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लेखनी कहानी -22-Dec-2022

किस काम की सांसे
मोहब्बत करके मैने मेरा सुख चैन खोया हैं
बचे ना अब तो आसू भी ये दिल इतना रोया हैं!1!
चलेथे कारवाँ के संग सुकु पाने की चाहत में
मुसाफिर कोई भी लेकिन यहा पलभर ना सोया हैं!2!
हर तरफ आग नफरत की मेरा तन मन जलाती हैं
न जाने किस आरीने राहो में काटो को बोया हैं!3!
फुल कितने भी सुंदर हो खुद ही से जुड नही सकते
प्रेम धागेने ही उनको माला में पिरोया हैं!4!©®
कवियिञी-अभिलाषा.देशपांडे

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4 Comments

Gunjan Kamal

23-Dec-2022 05:51 PM

शानदार प्रस्तुति 👌🙏🏻

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Sachin dev

23-Dec-2022 04:48 PM

Wonderful 👍🌺

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निखरते भाव सुमन । बधाई हो।

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Abhilasha deshpande

22-Dec-2022 11:01 PM

Thanks

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